عمرو علان: “نزار بنات” يعري وظيفية السلطة.. فما هي الآفاق؟

UPROOTED PALESTINIANS: SALAM ALQUDS ALAYKUM

عمرو علان

مِن أين يمكننا البدءُ بشكلٍ صحيحٍ؟ فهل نبدأ مِن توصيف جريمة اغتيال الشهيد نزار بنات على أنها جريمةٌ ضد حرية التعبير؟ أم ننطلق مِن كونها جريمة ضد حرية الرأي؟ أم من كونها جريمة فسادٍ أو تجاوزٍ لحدود الصلاحيات داخل جهازٍ أمنيٍّ في ظل دولةٍ ناجزةٍ؟ أم من كونها جريمة ضد “حقوق الإنسان” بمعناها الفضفاض والقابل للتأويل كيفما اتَّفَق؟

يجزم البعض أن هذه المنطلَقات سالفة الذكر تُغيِّب – بقصد أو بدونه – حقيقة توصيف ما جرى وتسلخه عن سياقاته، فما جرى كان في الواقع جريمةٌ ضد خَيارات نزار بنات في الأصل، وذلك بصفته جزء من نهجٍ يقاوم أو يدعو لمقاومة الاحتلال.

لقد جاءت هذه الجريمة المروِّعة لتثبت مجدداً صواب عموم ما طرحه الشهيد وآخرون في توصيف ما انتهت إليه السلطة الفلسطينية، التي يصح فيها ما صح في سائر التجارب السابقة لسلطات الحكم الذاتي تحت ظل الاحتلال في تجارب شعوبٍ أخرى، والتي لا تؤدي في نهاية المطاف إلا إلى خلق…

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